प्रेम की ऋतु फिर से आई
प्रेम की ऋतु फिर से आईफिर नयन उन्माद छायाफिर जगी है प्यास कोईफिर से कोई याद आयाफिर खिलीं कलियाँ चमन मेंरूप रस मदमा रहीं----प्रेम की मदिरा की गागरविश्व में ढलका रहीफिर पवन का दूत लेकरप्रेम का पैगाम आया-----टूटी है फिर से समाधिआज इक महादेव कीकाम के तीरों...
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शोभा
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[12 Feb 2010 09:22 AM]



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