फिर आया फागुन….
फिर आया फागुन….फिर आया फागुनरंगों की बहारतुम भी आजाओये दिल की पुकारटेसू के फूलों नेधरती सजाईअबीर, गुलाल नेचाहत जगाईकोयल की कुहूडसे बार- बारतुम भी आ जाओ…….खिलती नहीं दिल मेंभावों की कलियाँसूनी पड़ी मेरेजीवन की गलियाँतुम बिन ना मौसम मेंआए बहारतुम भी आजाओ….....
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शोभा
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[26 Feb 2010 09:11 AM]



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