मेरा सामान
एक दफ़ा जब याद है तुमको,जब बिन बत्ती सायकिल का चालान हुआ था..हमने कैसे, भूखे-प्यासे, बेचारों सी एक्टिंग की थी..हवलदार ने उल्टा एक अठन्नी देकर भेज दिया था..एक चव्वनी मेरी थी,वो भिजवा दो..सावन के कुछ भींगे-भींगे दिल रक्खे हैं,और मेरी एक ख़त में लिपटी रात...
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PD
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[23 Feb 2010 14:18 PM]



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