किताबों की दुनिया - 24

नीरज जैसे उजड़े हुए मंदिर में हवा का झोंका ऐसे आ जाएँ कभी लौट के आने वाले मुझसे क्या पूछते हो मैंने उन्हें कब देखा पेड़ की आड़ में थे तीर चलाने वालेढूंढ कर लाओ कोई हो तो सुलाने वाला सैंकड़ों लोग हैं दुनिया में जगाने वाले दुनिया वालों ने फकत उसको हवा दी थी... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज गोस्वामी
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[14 Feb 2010 23:35 PM]

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