यह समय हँसने के लिए है ...

समयचक्र मधुदेवी अपनी सहेली से - यार मेरे वो बड़े भुलक्कड़ हैं . एक दिन बाहर से घूमकर आये और अपनी घडी उतारकर बिस्तर पर रख दी और खुद जाकर मेज पर बैठ गए .रामप्यारी मधुदेवी से - यह कोई बड़ी बात नहीं है हमारे ताउजी बड़े भुलक्कड़ हैं . एक दिन बाहर से घूमकर आये और पान... [पूरी पोस्ट]
writer महेन्द्र मिश्र
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[22 Feb 2010 11:12 AM]

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