मै इसकी पनाह में हूँ
ये दुःखदुःख सा नहीं हैहंसते -मुस्काते करवट दर करवटबड़े भीतर धसाँ साँस लेता है,ये दुख ओढ़ते-बिछाते शाना ब शाना साथ देता है ....ये दुःखदुःख सा नही हैज़बाँ पे मीठा ,तासीर में ठंडाछुअन मखमली,संदली अहसासरूह से पाक-साफ़..ये दुःखदुःख सा नहीं हैअकसर बिना जिस्म...
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पारूल
मेरे फ़ितूर
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[17 Feb 2010 02:33 AM]



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