तुम्हारे प्रेम में स्वार्थी हो कहती हूँ
तेज़ी से बदलते माहौल में आस-पास देखते भय लगता है… सायेदार दरख्त भी समय आने पर झुकते ,कमज़ोर पड़ते हैं ……हमनें जिनसे अथाह प्रेम किया उन्हे लाचार देखना पसंद नहीं करते । मुमकिन है उम्र के किसी पड़ाव पर खुद अपने लिये यही दुआ माँगूं ....कुछ दिन पहले लगा तुम ७० के...
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पारूल
मेरे फ़ितूर
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[19 Feb 2010 00:39 AM]



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