झरना से मनोवेद तक का सफर - कुमार मुकुल - संस्मरण
यह 2000 के अंतिम महीनों की बात होगी जब पटना स्टेशन के निकट सीटीओ के मीडिया सेन्टर में पहली बार राजस्थान पत्रिका के पटना से संवाददाता और मित्र प्रियरंजन भारती ने मनोचिकित्सक डॉ.विनय कुमार से यह कहकर परिचय कराया था कि ये भी अच्छी गजलें...
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[26 Feb 2010 22:54 PM]



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