अपनी माटी को जकड़ी दूब हैं -गिरीश रंजन- नरेन

कारवाँ सत्यजित राय के साथ  गिरीश रंजनयह 1970 के दषक के शुरूआती दिनों की बात होगी। गिरीष ‘दा को मैंने पहली दफा कलकत्ता के सेंट्रल एवेन्यु के उस प्रख्यात कॉफी हाऊस में देखा था, जिसमें तमाम बांग्ला बुद्विजीवी और फिल्मकार आदि ‘अड्डेबाजी’ के लिये आया करते थे।... [पूरी पोस्ट]
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[03 Mar 2010 00:06 AM]

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