अरे बंदर है क्या..
बचपन में शरारतें करते देखकर प्यार से लोग प्यार से उलाहने भरतेअरे बंदर है क्या..हमने अपने स्टेटस में लिखा-हम सबके अंदर-है एक बंदरबंदर हमें अपनी हरकतों से अपनी ओर खींचता है। कुछ-कुछ मजा आता है। उसकी फुर्ती लाजवाब होती है। पलभर में यहां से वहां। मैं उसकी...
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प्रभात गोपाल झा
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[05 Mar 2010 01:30 AM]



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