होली का रंग बनाने के लिये नज़ीर अकबराबादी का पूरा गीत पढि़ये, ये पूरा सातों छंद के साथ आपने कहीं नहीं पढ़ा होगा । जब फागुन रंग झकमते हों तब देख

सुबीर संवाद सेवा म प्र जब फागुन रंग झमकते हों तब देख बहारें होली की। और दफ़ के शोर खड़कते हों तब देख बहारें होली की। परियों के रंग दमकते हों तब देख बहारें होली की। ख़ूम शीश-ए-जाम छलकते हों तब देख बहारें होली की। महबूब नशे में छकते हो तब देख बहारें होली की।। हो नाच रंगीली... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[20 Feb 2010 08:35 AM]

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