होली का तरही मुशायरा अंतिम भाग:- होली नहीं ये होला है, ये रंगों का गोला है । आज वरिष्‍ठों का छिछोरपन देखने का दिन है । राकेश खंडेलवाल जी, नीरज

सुबीर संवाद सेवा म प्र नोट :- होरी आ चुकी है और कल रंगों का दिन है । जो भी रंगों से परहेज करते हों वे घर से न निकलें । मेरे जैसे छिछोरे रंग लेकर घूम रहे हैं और जो किसी का कोई लिहाज नहीं करते हैं रंग डालने से पहले । हम तो पहिले ही कहे रहे कि ये सब कुछ ऊपर की पीढ़ी से ही आ रहा... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[28 Feb 2010 01:34 AM]

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