तुमने इश्क का नाम सुना है, हम ने इश्क किया है

हृदय गवाक्ष बेतहाशा चूमते हुए होंठो परअपना हाथ रख के,उस दिन जब पूंछा था तुमने कि "अब क्यों नहीं लिखता मै कविता तुम पर"कहना चाहता था कि "लिख ही तो रहा था अभीजब तुमने अचानक रख दिया हाथ.......!!"नोट: किसी ने किसी से कहा ऐसा और मैंने जस का तस लिख दिया कभी कभी यूँ भी हो... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

नेह दिवस

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[15 Feb 2010 04:21 AM]

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