एक मुक्तक
बहरे मुतकारिब सालिम मक़बूज असलम (१६ रुक्नी) जिस पर इस बार की तरही भी है और गुरु जी ने ढेरों गीत इस बहर पर बता रखे हैं। इसी बहर पर ये ताज़ा ताज़ा मुक्तक गुरु जी के आशीष से....मिलो किसी से तो अपना दिल तुम,ना पूरा पूरा उठा के रखना।वो जैसा दिखता है, हो कि ना...
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कंचन सिंह चौहान
मुक्तक
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[17 Feb 2010 06:28 AM]



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