कहां गया मेरा वो गाँव
बड़ी उलझन मैं हूं। व्यथित भी हूं। क्योंकि मेरा गाँव कहीं गुम हो गया है। वो गाँव जिसकी याद करते ही मन मयूर नाच उठता था। भला नाचता भी क्यों ना? गाँव का हर चेहरा भोला और अपनेपन से लबरेज था। पूरा गाँव प्यार का सागर नजर आता। शहर का अपनापन वाहनों के शोरगुल और...
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Manoj Pamar
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[13 Feb 2010 02:56 AM]



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