आओ फिर लहराएं तिरंगा प्यारा

सच को सलाम दिल और दिमाग में जंग चल रही है। कौन जीतेगा कौन हारेगा, कुछ भी कहना मुश्किल है। दिल जज्बाती हो रहा है। अपने यारों के फोन इन जज्बातों को और हवा दे रहे हैं। जज्बातों का ज्वार यूं ही नहीं उठ रहा। क्योंकि जज्बातों के केंद्र में वो कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम है,... [पूरी पोस्ट]
writer Manoj Pamar
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[22 Feb 2010 07:33 AM]

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