किसान और कृषक कैसे एक हो गए!!...

एक हिंदुस्तानी की डायरी वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपने बजट भाषण के अंत में कहा है कि यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है। इसमें बाकी सब तो ठीक है, लेकिन किसान और कृषक का फर्क समझ में नहीं आया। असल में वित्त मंत्री ने अपने मूल अंग्रेजी भाषण... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल रघुराज

अर्थनीति

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[26 Feb 2010 09:08 AM]

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