दो प्रेम कविताएं

अनहद नाद केदारनाथ अग्रवाल की एक कविता जमुन जल तुम रेत मैं हूं — जमुन जल तुम ! मुझे तुमने हृदय तल से ढंक लिया है और अपना कर लिया है अब मुझे क्या रात — क्या दिन क्या प्रलय — क्या पुनर्जीवन ! रेत मैं हूं — जमुन जल तुम ! मुझे तुमने सरस रस से... [पूरी पोस्ट]
writer PRIYANKAR

कविताएं/poems

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[14 Feb 2010 00:46 AM]

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