वो गुमनाम खत पार्ट १

उम्मीद है कम्बख्त साइकिल को पता नहीं तमाम रास्तों की पहचान कैसे थी। स्कूल जाते वक्त रास्ता भटक जाना, गर्ल्स कॉलेज के सामने अदब से रफ्तार थाम लेना या फिर सिनेमाघर के स्टैंड पर घंटों तक आराम फरमाने की जिद के आगे मेरी ईमानदारी कई बार हारी। कभी हमारी साइकिलों ने... [पूरी पोस्ट]
writer सुबोध
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[15 Feb 2010 05:34 AM]

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