ग़ज़ल

अशांत महासागर मुद्दत बीत गई उनको देखे हुएशब्दों ने आज उनका अक्स घड़ा हैदिल ने चाहा आंखों में समा लूंआंसूओं ने मेरे सिर इल्ज़ाम मढ़ा हैकुछ तो है जो तुझसे भूल हुईक्यों वो तुमसे इतना दूर खड़ा हैतेरी आंखों की झलक थी दुनिया जिसकीआज कहते हैं कि वीराना पड़ा हैकुछ तो ऐसा कर... [पूरी पोस्ट]
writer vijaymaudgill
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[10 Feb 2010 11:38 AM]

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