खग्रास
हमने अँधेरे को मिटाने की कोशिशपर गुलाम हो गए चमकते बल्बों की चौंधियाहट सेकि नहीं दिखता कुछ भी उस चमकते अँधेरे में,गढ़ा एक नया अँधेरा जिसकी रोशनी में मिटा दिया दिन कोखिड़की पे खींच कर पर्दातुम्हारी निराशा को अपनी कोशिश मेंठीक करते करते मैं भूल भी गया अपनी...
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मोहन राणा - Mohan Rana
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[15 Feb 2010 08:05 AM]



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