कालापानी नीली लहरें
कर दो दान चुराया माल- भला करे भगवानना लिखे भीना सोचे भीना चीख पुकार के भीनानाविध उपकरण और विधियाँ भी बेकार हैंउपाय यही इस मन से मोक्ष काअब खाली दानपात्र में बस बचा मैं ही हूँचुराता नहीं जिसे वहाँ से कोई ,कभी कभी देखना भी जरूरी होता हैआइने को अपने अलावा...
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मोहन राणा - Mohan Rana
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[17 Feb 2010 10:39 AM]



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