पांचवा - इंटरनॅशनल पोयट्री फेस्टिवल आफ कृत्या-2010

जुगलबन्दी कृत्या2010 के अन्तिम दिवस की शाम, हम सब अजीब सी मनोस्थिति में है, एक बेहद सशक्त काव्य पाठ की सुनहरी आभा के बीचोबीच में से गुजर चुके हैं, मादक मोहात्मकता हमें बाँध रही है यात्राएँ हमें अपने नीड़ की ओर ले चलने को तैयार हैं...अलग अलग भाषाएँ, अलग अलग अलग... [पूरी पोस्ट]
writer विजेंद्र एस विज

कला नुमाइश

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[11 Feb 2010 01:20 AM]

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