एक कहानी: एक कविता
जाने किस आहट से नींद खुल जाती है.कोई थकान नहीं, शायद नींद पूरी हो गई. खिड़की के बाहर झांकता हूँ. सफेद रात. जहाँ तक नजर जाती है, बरफ ही बरफ और रुई के फाहे की तरह गिरती लहराती बरफ अभी भी थमी नहीं है. घड़ी पर नजर डालता हूँ. ३ बज कर १० मिनट. अब फिर से सोने की...
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Udan Tashtari
कविता
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[10 Feb 2010 20:00 PM]



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