यूँ बीत गया समय...
इधर मैं कुछ लिख नहीं रहा हूँ. बिल्कुल चुप! मैं तब भी चुप था, जब उसकी शादी होना तय हुआ था. उस रात चाँद खामोश था और मैं अपनी छत से कूद उसके छतरी वाले कमरे में उसका हाथ थामें बस उसे मौन देखता रहा था. हमारे बीच एक घुप्प सन्नाटा पसरा था और उस छतरी वाले कमरे...
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Udan Tashtari
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[07 Mar 2010 21:14 PM]



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