आरज़ू लखनवी को क्यूँ भूलें ?
सहगल साहब को सलाम और आरज़ू लखनवी को भी। नौशाद साहब जिन आरज़ू को अल्लामा आरज़ू कहकर कान पकड़ते थे , उनके लिखे को न्यू थियेटर के बी एन सरकार पत्थर की लकीर समझते थे ।सुनिए ये ग़ज़ल -...
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इरफ़ान
आरज़ू लखनवी
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[14 Feb 2010 05:01 AM]



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