कितनी दूर निकल आया ?

TAPASHWANI पाँव जमीं पर रख करके,कल ही तो चलना सीखा था |नन्हे नन्हे कदमो से मै,कितनी दूर निकल आया |गुड्डे गुड़ियों के किस्से,मानो कल कि ही बातें थी,मै अपनो के दामन  से,ये कितनी दूर निकल आया |नींद  नहीं आती थी  मुझको,माँ कि... [पूरी पोस्ट]
writer Tapashwani Anand
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[21 Feb 2010 08:08 AM]

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