पहले ही उपन्यास लिखवा लेते?

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग मेलबॉक्स खोला तो चिट्ठाजगत से, हमसब के प्यारे चिट्ठाजगत से एक मेल पढ़ने को मिला. लिखा था; आदरणीय एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं। क्या से क्या हो गया, और क्यों, आपका क्या सोचना है? भाग लीजिए चिट्ठाजगत.इन... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv Kumar Mishra
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[19 Feb 2010 23:27 PM]

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