काश ....(प्रेम दिवस पर )

कुछ मेरी कलम से -kuch  meri kalam se ** प्रेम के सागर को ,प्रेम की गहराई को ,प्रेम के लम्हों को ,कब कोई बाँध पाया है ..पर इक मीठा सा एहसास ,दिल के कोने में ..दस्तक देने लगता हैजब मैं तुम्हारे करीब होती हूँकि काश ..प्यार की हर मुद्रा मेंहम खुजराहो की मूरत जैसेबस वही थम जाएलम्हे साल ,युग बसयूँ... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना [रंजू भाटिया]

प्रेम रोमांस

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[13 Feb 2010 07:17 AM]

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