तेरे छूने से
तेरे छुने से बरसो बाद मेरा मौन टूटा है एक पर्दा सा था तन मन पर मेरे तेरे छुने से वो भ्रम जाल टूटा हैआज बरसो बाद दिल में प्यार फूटा है !!हिमनदी सी जमी हुई थी मैं तेरे छुने से एक गर्माहट हुई सोई हुई तितलियों के पंख में फिर से कोई अकूलाहट हुई दिल में फिर से...
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रंजना [रंजू भाटिया]
kavita prem .ehsaas
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[25 Feb 2010 01:14 AM]



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