पलाश के फूल

रजनीगन्धा कोयल कुहकीअमुआ महकीपोखर पीलासूरज निकलाले फूलों के कलश कईड्योढ़ी फैलेअंगना खेलेनव पल्लवपक्षी का कलरवउल्ल्सित बसंत से खेल कईगुब्बारे फूटेगुलाल, रंग छूटेअब गली ढूँढॆनुक्कड़ ढूँढेवह दिवस जब बिखरे थे रंग कईचौबारे के रंगघर में हैं बंदसूखी होलीजाए अबोलीबुलाए दर... [पूरी पोस्ट]
writer रजनी भार्गव
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[01 Mar 2010 23:56 PM]

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