नक्सलवादी, आतंकवादी और भगत सिंह

सफर - राजीव रंजन प्रसाद कुहु बिटिया अब हाथी-घोडे की कहानियों से आगे आ गयी है, क्यों न हो वह अब कक्षा दूसरी में जो जाने वाली है। आज मैंने भगत सिंह से उसका परिचय कराया। “बेटा भगत सिंह नें संसद के भीतर बम और आजादी के पर्चे फेंके” मैं कहानी सुना रहा था। ”लेकिन पापा बम क्यों फेंका... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद

भगत सिंह

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[19 Feb 2010 05:32 AM]

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