बारिश और बिच्छू
बहुत पुरानी स्मृतियों में , मेरी नहीं , माँ की स्मृति में , जो जाने कितनी बार दोहराई गई हैं , बरसाती दोपहरों में और कुहासे घिरी ठंडी रातों में , चाय की प्यालियों की भाप के बीच और खाने के बाद सौंफ की खुशबूदार जुगालियों के गिर्द , सोचते और फिर याद करते ,...
[पूरी पोस्ट]
Pratyaksha
6
0
0
0
0
[19 Feb 2010 12:25 PM]



Shuffle








