दो क्षणिकाएं

दिशाएं पता नही- किस की नजर लग गई है... अब मेरा बटुआ पहले जैसा नजर नही आता। जेब मे होते हुए भी जेब में है... लेकिन... मै जान नही पाता। ***************************** इस मंदी से मार.... हम और तुमको खानी है। नेता तो इस मंदी से भी फायदा उठाएंगे। वे जानते हैं ...... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

परमजीत बाली

views
0
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 19:10 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix