सपनों की बात

पहलू एक बंद दरवाजा खुलता हैएक गहरा आंगन दिखता हैएक बड़ा पीतल का हंडाएक चापाकलएक चीनी की बोरी खुली हुईनाबदान पर मांजने कोया चढ़ाने से पहले धोने को रखे बर्तनयहां कोई आयोजन हो चुका हैया शायद होने वाला हैलेकिन मैं यहां क्यों हूंपता नहीं चलताएक उखड़े हुए सूखे पेड़... [पूरी पोस्ट]
writer चंद्रभूषण

कवितायेँ

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[20 Feb 2010 09:09 AM]

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