संस्कृति की अश्लील परम्परा उर्फ़ बहुत हुआ सम्मान

निर्मल-आनन्द इलाहाबाद में अपने छात्र जीवन की शुरुआत के साथ ही अश्लील परम्पराओं से मेरा परिचय हो गया था। हमें हौस्टल के सीनियर्स ने फ़र्शी सलामी सिखलाई और जिस हौस्टल गीत को याद कर के उचित अवसरों पर सुनाने की हमें ताक़ीद की गई उसमें पुरुष के अंग विशेष के गुणगान किए गए... [पूरी पोस्ट]
writer अभय तिवारी

चकाचक

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[05 Mar 2010 00:34 AM]

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