जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,
जब भी देखोगे मुझे इसी हाल में पाओगे,आँख में आँसू, लबों को हँसता हुआ पाओगेतुम्हारा तो खैर यकीन है मुझे खुद से ज्यादा,आँसू दिया है जब आज तो कल भी रुलाओगेमेरा क्या है? एक अदना-सा आदमी ही तो हूँआखिर कब तक मुझे तुम याद रख पाओगे?मुझे तो अपनी ख़ाक पर भी कोई हक़...
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Neeraj
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[25 Feb 2010 14:47 PM]



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