तो बड़ा शायर हूँ..
मैं चाँद को दरीचों में उतारूँ तो बड़ा शायर हूँ,मैं रात से गलीचों को सवारूँ तो बड़ा शायर हूँ,मैं ख़्वाब में तारों की पनाह लूँ तो बड़ा शायर हूँ,मैं आग से साँसों की निबाह लूँ तो बड़ा शायर हूँ,मैं रूह की ये राख उड़ा दूँ तो बड़ा शायर हूँ,मैं जिस्म की हर फ़ाँक...
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विश्व दीपक
vishwa deepak tanha
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[14 Feb 2010 17:27 PM]



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