पेड़ो, तुम जंगल में ही रहना
जनवरी 2010 की दूसरी कविता नवम्बर 2009 माह के यूनिकवि रह चुके रवीन्द्र शर्मा 'रवि' की है। रवि अपनी ख़ास किस्म की ग़ज़लों के लिए भी हिन्द-युग्म के पाठकों के मध्य पहचाने जाते हैं।पुरस्कृत कविता: पेड़तुमने उसी दिन रहन रख दी थी अपनी अस्मिता जिस दिन तुमने आदमी...
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ravindra sharma ravi
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[21 Feb 2010 08:30 AM]



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