हमारा आम होता है तुम्हारा खास होता है

हिन्द-युग्म कभी खामोश लम्हों में मुझे अहसास होता है कि जैसे ज़िन्दगी भी रूह का बनवास होता है जिसे वो रौनके होने पे अक्सर भूल जाता है वही तन्हाईओं में आदमी के पास होता है सुना था दर्द होता है ग़मों का एक सा लेकिन हमारा आम होता है तुम्हारा खास होता है किसी के वास्ते... [पूरी पोस्ट]
writer नियंत्रक । Admin

ravindra sharma ravi

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[05 Mar 2010 05:59 AM]

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