ग़ज़ल- तेरा क्या और मेरा क्या है

मानसी तेरा मेरा रिश्ता क्या हैफिर इस दर्द का मुद्दा क्या हैहर इक बात में ज़िक्रे-यार अबतर्के-तआल्लुक़ है, या क्या है(तर्के-तआल्लुक़- टूटा रिश्ता) उमर लगी तारुफ़ होने मेंखु़द से मिल कर रोता क्या है(तआरुफ़- पहचान होना) एक नशेमन तिनका तिनका तेरा क्या और मेरा क्या... [पूरी पोस्ट]
writer मानसी

poetry

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[06 Mar 2010 16:08 PM]

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