चाहिए कुछ भी नहीं

इयत्ता चाहिए कुछ भी नहीं तुमसे मुझेन सांसों की सरगमन आने की आहटन धुंध खयालों कान अहसास रहगुजर साशहनाई भी नहींरानाई भी नहींपरछाई भी नहींतनहाई भी नहींरुसवाई भी नहींतुम सोचते होगे यहक्या चाहिए है मुझकोबस साथ इस तरह सेमिलता रहे तुम्हाराजब जी में आए देखूंजब जी करे... [पूरी पोस्ट]
writer रतन

कविता

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[27 Feb 2010 07:03 AM]

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