फागुन आया रे!

इयत्ता मेरे एक कवि मित्र ने घोषणा की है – फागुन आया रे! कब आया, कहां से आया, किस रास्ते आया, किसके मार्फ़त आया और कब तक ठहरेगा... इन सवालों का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया है. सीधे काम की बात पर आ गए. सबसे पहले सीधे यही बता दिया कि किसलिए आया है. एकदम दिल्ली... [पूरी पोस्ट]
writer इष्ट देव सांकृत्यायन

व्यंग्य

views
7
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[27 Feb 2010 20:39 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix