कांकड-कांकड चुनि लयो, हीरा दिया गंवाय!

Bas Yun Hi Nahin एक आदमी जीवन से बहुत निराश था. उसे सभी सुख की चाहना थी. दुख की वह कल्पना भी नहीं कर पाता था. ज़ाहिर है, दुनिया में सभी को सभी सुख नहीं मिल पाते हैं. मगर आदमी इसे समझने से इंकार करता था. एक दिन अपनी निराशा में वह नदी किनारे बैठा था और अनमने भाव से अपने... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani

हीरा

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[18 Feb 2010 20:40 PM]

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