मेरी जिंदगी में किताबें - 2
कितनी आसानी से किसी को सबकुछ देकर उसका सबकुछ छीना जा सकता है और वो उफ तक नहीं करेगा, उल्टे इस छीन जाने के बदले आपका एहसानमंद होगा। इलाहाबाद के वो साथी आज भी दिल्ली के पुस्तक मेलों में परिवार के साथ घूमते हुए मिल जाते हैं और आज जब किताबें न खरीद पाने...
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मनीषा पांडे
किताबें
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[18 Feb 2010 11:25 AM]



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