मेरी जिंदगी में किताबें - 3

बेदखल की डायरी ज्‍यादातर दोस्‍तों ने किताबें खरीदना छोड़ दिया है और किताबों के बारे में बात करना भी। गलती उनकी भी नहीं है। जीवन ही ऐसा है। तंख्‍वाह के अंकों में जीरो बढ़ाते जाने और कॅरियर में एक आला मुकाम हासिल करने के लिए लोग मुंह अंधेरे दफ्तरों के लिए निकलते हैं और रात... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे

किताबें

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[20 Feb 2010 04:39 AM]

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