सिनेमाई झरोखों से जिंदगी की झलक

बेदखल की डायरी अजय जी के पुरजोर इसरार पर मैंने महीनों टालने के बाद मेरी जिंदगी में सिनेमा के अनुभवों से जुड़ा ये एक पीस लिखा था, जिसे उन्‍होंने अपने ब्‍लॉग चवन्‍नी चैप पर लगाया है। किताबों पर लिखते हुए उसी रौ में मैंने सिनेमा पर भी कलम घसीट डाली। क्‍या है, कैसी है, पढ़ने... [पूरी पोस्ट]
writer मनीषा पांडे

सिनेमा

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[23 Feb 2010 14:09 PM]

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