एक दमनकारी होते राज्य में जनता का प्रतिरोध और साहित्य की जिम्मेदारियां
तद्भव का यह संपादकीय अपने आप में एक पूरी टिप्पणी है. हाशिया पर साभार.इन दिनों राज्य के दमनकारी चरित्र को लेकर विचार मंथन की प्रक्रिया तीव्र हुई है। नक्सलवाद के सफाये के नाम पर बेकसूर और मुफलिस लोगों पर राज्य का कहर इसका ताजा और ज्वलंत उदाहरण है। यह एक...
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Reyaz-ul-haque
आओ बहसियाएं
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[24 Feb 2010 01:43 AM]



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