वह गोबर होली वर्ष था !..............................................घुघूती बासूती
कहाँ कहाँ खेली, कैसी कैसी तो होलीजैसी हमने खेली वैसी ही हो ली होलीजहाँ जहाँ गए हम संग हो ली होलीतेरी, मेरी, उसकी हम सबकी होली।होली का दिन आता है तो उसके कुछ पहले से व उसके कुछ बाद तक मुझे अलग अलग जगहों पर खेली होली की याद आती है। हम लोग हैं बंजारे, हर दो...
[पूरी पोस्ट]
Mired Mirage
लेख
4
0
0
0
0
[26 Feb 2010 09:12 AM]



Shuffle








