मैं हूँ उलझा हुआ अभी तक

गीत कलश तुमने जो सम्बोधन देकर मुझे पुकारा खंजननयननेबस उस के ही सन्दर्भों में, मैं हूँ उलझा हुआ अभी तकफ़िसला हुआ अधर की कोरों से, चढ़ कर स्वर की लहरी परथाम हवाओं के झोंके की उंगलियाँ जो मुझ तक आयामन में उमड़ रहे भावों की ओढ़े रंग भरी दोशालाजिसे सांझ की परछाईं ने काजल... [पूरी पोस्ट]
writer राकेश खंडेलवाल
views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[14 Feb 2010 20:58 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix